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Paul Deslandes

Report. विस्तार से राजा विक्रम, योगी और बेताल की कहानी जानने के लिए यहां क्लिक करें। … “Kahaniya Vikram aur Betaal ki” is a TV series telecasted on DD Network, Colors channel. Vikram Betal. अगर तू जानते हुए भी उत्तर नहीं देगा तो मैं तुम्हारे सिर के टुकड़े-टुकड़े कर दूँगा।, बुद्धिमान विक्रम उत्तर जानते थे उसने कहा, “सुन बेताल वह चोर रोया तो इसलिए कि इतनी चोरी करने के बाद वह उस धन का उपयोग नहीं कर पाया और जिस शरीर के लिए वो चोरी कर रहा था, उसे अब वह छोड़ने वाला था और हँसा इसलिए कि रत्नावती बड़े-बड़े राजाओं और धनिकों को छोड़कर उस पर मुग्ध होकर मरने को तैयार हो गयी। स्त्री के मन की गति को कोई नहीं समझ सकता।”, इतना सुनकर बेताल बोला बहुत खूब तुमने बहुत अच्छा गणित किया लेकिन न बोलने की शर्त तोड़ दी और बेताल गायब हो गया और पेड़ पर जा लटका। राजा फिर वहाँ गया और उसे लेकर चला तो रास्ते में उसने फिर एक कहानी कही।, नेपाल देश में शिवपुरी नामक नगर में यशकेतु नामक राजा राज करता था। उसके चन्द्रप्रभा नाम की रानी और शशिप्रभा नाम की लड़की थी।, जब राजकुमारी बड़ी हुई तो एक दिन वसन्त उत्सव देखने बाग़ में गयी। वहां एक ब्राह्मण का लड़का आया हुआ था। दोनों ने एक-दूसरे को देखा और प्रेम करने लगे। इसी बीच एक पागल हाथी वहां दौड़ता हुआ आया। ब्राह्मण का लड़का राजकुमारी को उठाकर दूर ले गया और हाथी से बचा दिया। शशिप्रभा महल में चली गयी, पर ब्राह्मण के लड़के के लिए व्याकुल रहने लगी।, उधर ब्राह्मण के लड़के की भी बुरी दशा थी। वह एक सिद्ध-गुरू के पास पहुँचा और अपनी इच्छा बतायी। गुरु ने एक योग-गुटिका अपने मुँह में रखकर ब्राह्मण का रूप बना लिया और एक गुटिका ब्राह्मण के लड़के के मुँह में रखकर उसे सुन्दर लड़की बना दिया और राजा के पास जाकर कहा, “मेरा एक ही बेटा है। उसके लिए मैं इस लड़की को लाया था, पर लड़का न जाने कहाँ चला गया। आप इसे यहाँ रख ले। मैं लड़के को ढूँढ़ने जाता हूँ। मिल जाने पर इसे ले जाऊँगा।”, सिद्ध-गुरु चला गया और लड़की के वेश में ब्राह्मण का लड़का राजकुमारी के पास रहने लगा। धीरे-धीरे दोनों में बड़ा प्रेम हो गया। एक दिन राजकुमारी ने कहा, “मेरा दिल बड़ा दुखी रहता है। एक ब्राह्मण के लड़के ने पागल हाथी से मेरे प्राण बचाये थे। मेरा मन उसी में रमा है।”, इतना सुनकर उसने गुटिका मुँह से निकाल ली और ब्राह्मण कुमार बन गया। राजकुमारी उसे देखकर बड़ी प्रसन्न हुई। तबसे वह रात को रोज़ गुटिका निकालकर लड़का बन जाता और दिन में लड़की बना रहता। दोनों ने चुपचाप विवाह कर लिया।, कुछ दिन बाद राजा के साले की कन्या मृगांकदत्ता का विवाह दीवान के बेटे के साथ होना तय हुआ। राजकुमारी अपने कन्या-रूपधारी ब्राह्मण कुमार के साथ वहां गयी। संयोग से दीवान का पुत्र उस बनावटी कन्या पर रीझ गया। विवाह होने पर वह मृगांकदत्ता को घर तो ले गया, लेकिन उसका हृदय उस कन्या के लिए व्याकुल रहने लगा।, उसकी यह दशा देखकर दीवान बहुत हैरान हुआ। उसने राजा को समाचार भेजा। राजा आया। उसके सामने सवाल था की धरोहर के रूप में रखी हुई उस ब्राह्मण के कन्या को वह कैसे दे दे? Follow. Watch Kahaniya Vikram Aur Betaal Ki - 7th June 2009 - Pt2 - Adil Siddiqui on Dailymotion. Vikram Betaal Ki Rahasya Gatha is a mythological serial created by Peninsula Pictures, based on Baital Pachisi (which is also known as Vikram-Betaal). रास्ते में फिर उसने एक कहानी सुनाई।, चित्रकूट नगर में एक राजा रहता था। एक दिन वह शिकार खेलने जंगल में गया। घूमते-घूमते वह रास्ता भूल गया और अकेला रह गया। थक कर वह एक पेड़ की छाया में लेटा कि उसे एक ऋषि-कन्या दिखाई दी। उसे देखकर राजा उस पर मोहित हो गया।, थोड़ी देर में ऋषि स्वयं आ गये। ऋषि ने पूछा, “तुम यहाँ कैसे आये हो?”राजा ने कहा, “मैं यहां शिकार खेलने आया था।ऋषि बोले, “बेटा, तुम क्यों जीवों को मारकर पाप कमाते हो?”, राजा ने वादा किया कि मैं अब कभी शिकार नहीं खेलूँगा। खुश होकर ऋषि ने कहा, “तुम्हें जो माँगना हो, माँग लो।”, राजा ने ऋषि-कन्या माँगी और ऋषि ने खुश होकर दोनों का विवाह कर दिया। राजा जब उसे लेकर चला तो रास्ते में एक भयंकर राक्षस मिला। बोला, “मैं तुम्हारी रानी को खाऊँगा। अगर चाहते हो कि वह बच जाय तो सात दिन के भीतर एक ऐसे ब्राह्मण-पुत्र का बलिदान करो, जो अपनी इच्छा से अपने को दे और उसके माता-पिता उसे मारते समय उसके हाथ-पैर पकड़ें।”, डर के मारे राजा ने उसकी बात मान ली। वह अपने नगर को लौटा और अपने दीवान को सब हाल कह सुनाया। दीवान ने कहा, “आप परेशान न हों, मैं उपाय करता हूँ।”, इसके बाद दीवान ने सात बरस के बालक की सोने की मूर्ति बनवायी और उसे कीमती गहने पहनाकर नगर-नगर और गाँव-गाँव घुमवाया। यह कहलवा दिया कि जो कोई सात बरस का ब्राह्मण का बालक अपने को बलिदान के लिए देगा और बलिदान के समय उसके माँ-बाप उसके हाथ-पैर पकड़ेंगे, उसी को यह मूर्ति और सौ गाँव मिलेंगे।, यह ख़बर सुनकर एक ब्राह्मण-बालक राजी हो गया, उसने माँ-बाप से कहा, “आपको बहुत-से पुत्र मिल जायेंगे। मेरे शरीर से राजा की भलाई होगी और आपकी गरीबी मिट जायेगी।”, माँ-बाप ने मना किया, पर बालक ने हठ करके उन्हें राजी कर लिया।, माँ-बाप बालक को लेकर राजा के पास गये। राजा उन्हें लेकर राक्षस के पास गया। राक्षस के सामने माँ-बाप ने बालक के हाथ-पैर पकड़े और राजा उसे तलवार से मारने को हुआ। उसी समय बालक बड़े ज़ोर से हँस पड़ा।, इतना कहकर बेताल बोला, “हे राजन्, यह बताओ कि वह बालक क्यों हँसा? Aj fir Vikram ne Betal ko pakda aur usko apne pith par bithakar le ja raha tha. June 12, 2020 July 24, 2020 Pankaj Kumar 2 Comments stories of vikram betal, vikram aur betaal cast, vikram betal first story, vikram betal ki kahaniyan, vikram betal last story, Vikram Betal Story in Hindi To disable, switch Autoplay to ‘OFF’ under Settings. यदि तू उत्तर जानते हुए भी नहीं बताएगा तो तेरा सिर फट जाएगा।”, यह सवाल सुनकर राजा बड़े चक्कर में पड़ा। उसने बहुत सोचा, पर जवाब न सूझ पड़ा। इसलिए वह चुपचाप चलता रहा।, बेताल यह देखकर बोला, “राजन्, कोई बात नहीं है। मैं तुम्हारे धीरज और पराक्रम से खुश हूँ। मैं अब इस मुर्दे से निकल जाता हूँ। तुम इसे योगी के पास ले जाओ। जब वह तुम्हें इस मुर्दे को सिर झुकाकर प्रणाम करने को कहे तो तुम कह देना कि पहले आप करके दिखाओ। जब वह सिर झुकाकर बतावे तो तुम उसका सिर काट लेना। उसका बलिदान करके तुम सारी पृथ्वी के राजा बन जाओगे। सिर नहीं काटा तो वह तुम्हारी बलि देकर सिद्धि प्राप्त करेगा।”, इतना कहकर बेताल चला गया और राजा मुर्दे को लेकर योगी के पास आया।, योगी राजा को और मुर्दे को देखकर बहुत प्रसन्न हुआ। बोला, “हे राजन्! मैं अब उसके पास नहीं जाऊँगा।”, दीवान का बेटा बोला, “नहीं, अब ऐसा उपाय करना चाहिए, जिससे हम उसे घर ले चलें। आज रात को तुम वहां जाओ। जब राजकुमारी सो जाये तो उसकी बायीं जाँघ पर त्रिशूल का निशान बनाकर उसके गहने लेकर चले आना।”, राजकुमार ने ऐसा ही किया। उसके आने पर दीवान का बेटा उसे साथ ले, योगी का भेस बना, मरघट में जा बैठा और राजकुमार से कहा कि तुम ये गहने लेकर बाज़ार में बेच आओ। कोई पकड़े तो कह देना कि मेरे गुरु के पास चलो और उसे यहाँ ले आना।, राजकुमार गहने लेकर शहर गया और महल के पास एक सुनार को उन्हें दिखाया। देखते ही सुनार ने उन्हें पहचान लिया और कोतवाल के पास ले गया। कोतवाल ने पूछा तो उसने कह दिया कि ये मेरे गुरु ने मुझे दिये हैं। गुरु को भी पकड़वा लिया गया। सब राजा के सामने पहुँचे।, राजा ने पूछा, “योगी महाराज, ये गहने आपको कहाँ से मिले?”, योगी बने दीवान के बेटे ने कहा, “महाराज, मैं मसान में काली चौदस को डाकिनी-मंत्र सिद्ध कर रहा था कि डाकिनी आयी। मैंने उसके गहने उतार लिये और उसकी बायीं जाँघ में त्रिशूल का निशान बना दिया।”, इतना सुनकर राजा महल में गया और उसने रानी से कहा कि पद्मावती की बायीं जाँघ पर देखो कि त्रिशूल का निशान तो नहीं है। रानी ने देखा, तो सही में निशान था। राजा को बड़ा दु:ख हुआ। बाहर आकर वह योगी को एक ओर ले जाकर बोला, “महाराज, धर्मशास्त्र में खोटी स्त्रियों के लिए क्या दण्ड है?”, योगी ने जवाब दिया, “राजन्, ब्राह्मण, गऊ, स्त्री, लड़का और अपने आसरे में रहनेवाले से कोई खोटा काम हो जाये तो उसे देश-निकाला दे देना चाहिए।” यह सुनकर राजा ने पद्मावती को डोली में बिठाकर जंगल में छुड़वा दिया। राजकुमार और दीवान का बेटा तो ताक में बैठे ही थे। राजकुमारी को अकेली पाकर साथ ले अपने नगर में लौट आये और आनंद से रहने लगे।, इतनी बात सुनाकर बेताल बोला, “राजन्, यह बताओ कि पाप किसको लगा है?”, विक्रम ने कहा, “पाप तो राजा को लगा। दीवान के बेटे ने अपने स्वामी का काम किया। कोतवाल ने राजा का कहना माना और राजकुमार ने अपना मनोरथ सिद्ध किया। राजा ने पाप किया, जो बिना विचारे उसे देश-निकाला दे दिया।”, राजा का इतना कहना था कि बेताल फिर उसी पेड़ पर जा लटका। राजा वापस गया और बेताल को लेकर चल दिया। बेताल बोला, “विक्रम तुम बड़े हठी मालूम होते हो, लेकिन कोई बात नहीं। देखता हूँ कितने हठी और कितने धैर्यवान हो।”, यमुना के किनारे धर्मस्थान नामक एक नगर था। उस नगर में गणाधिप नाम का राजा राज करता था। उसी में केशव नाम का एक ब्राह्मण भी रहता था। ब्राह्मण यमुना के तट पर जप-तप किया करता था। उसकी एक पुत्री थी, जिसका नाम मालती था। वह बड़ी रूपवती थी।, जब वह ब्याह के योग्य हुई तो उसके माता, पिता और भाई को चिन्ता हुई। संयोग से एक दिन जब ब्राह्मण अपने किसी यजमान की बारात में गया था और भाई पढ़ने गया था, तभी उनके घर में एक ब्राह्मण का लड़का आया। लड़की की माँ ने उसके रूप और गुणों को देखकर उससे कहा कि मैं तुमसे अपनी लड़की का ब्याह करूँगी। उधर ब्राह्मण पिता को भी एक दूसरा लड़का मिल गया और उसने उस लड़के को भी यही वचन दे दिया। उधर ब्राह्मण का लड़का जहाँ पढ़ने गया था, वहां वह एक लड़के से यही वादा कर आया।, कुछ समय बाद बाप-बेटे घर में इकट्ठे हुए तो देखते क्या हैं कि वहां एक तीसरा लड़का और मौजूद है। दो उनके साथ आये थे। अब क्या हो? नहीं बताओगे तो तुम्हारी खोपड़ी फट जाएगी ये मेरा श्राप हैं”, विक्रम बोला, “जो कपड़ा बनाकर बेचता है, वह शूद्र है। जो पशुओं की भाषा तथा शरीर के अंगों की जानकारी रखता है, वह वैश्य है। जो शास्त्र पढ़ा है, ब्राह्मण है; पर जो शब्दवेधी तीर चलाना जानता है, वह राजकुमारी का सजातीय है और उसके योग्य है। राजकुमारी उसी को मिलनी चाहिए।”, राजा के इतना कहते ही बेताल भयानक अट्टहास करते हुए गायब हो गया। मैना बोली, “महाराज, यह सब मैंने अपनी आँखों से देखा। ऐसा पापी होता है आदमी!”, राजा ने तोते से कहा, “अब तुम बताओ कि स्त्री क्यों बुरी होती है?” 23:01. - बेताल पच्चीसी - इक्कीसवीं कहानी! Download Vikram Betal Kahaniya in Hindi apk 1.0 for Android. इन दोनों को जिला दो।” देवी ने कहा, “अच्छा, तुम दोनों के सिर मिलाकर रख दो।”, घबराहट में स्त्री ने सिर जोड़े तो गलती से एक का सिर दूसरे के धड़ पर लग गया। देवी ने दोनों को जिला दिया। अब वे दोनों आपस में झगड़ने लगे। एक कहता था कि यह स्त्री मेरी है, दूसरा कहता मेरी।, इतनी कहानी सुनाने के बाद बेताल रूक गया। Log in. Vikram Betal Stories in Hindi - Best Vikram Betal ki Kahaniya for all 12 years ago | 5.2K views. Search. These are spellbinding stories told to the wise King Vikramaditya by the wily ghost Betaal. तीसरी राजकुमारी इतनी कोमल थी कि यदि कोई उसके सामने थोड़ा जोर से भी बोल देता तो वह आवाज़ मात्र से ही बेहोश हो जाया करती और सबसे छोटी वाली का हाल दूसरी राजकुमारी जैसे ही था लेकिन उसमें एक अलग गुण था। वो किसी भिखारी या गरीब को देख लेती तो उससे रहा नही जाता और कुछ न कुछ जरूर दान कर देती।, जो भी इन राजकुमारियों के कोमलता के बारे में सुनता आश्चर्य करता। जैसे-जैसे कन्याएं बड़ी होती राजा को उनके विवाह की चिन्ता बढ़ते जाती। कई राजकुमार उनसे विवाह करने के इच्छुक हो गये।राजा सोचते यदि इनका विवाह कर भी दिया जाये तो ये चारों इस कठोर संसार में रह भी पायेंगी या नहीं।, पहली को हमेशा छाव में रखा जाता, दूसरी तथा सबसे छोटी राजकुमारी को बहुत ही हल्के कपड़े और गहने दिये जाते फिर भी उन्हें भारी लगता और तीसरी के सामने बोलना तो दूर, पैर की आवाज भी न होने पाती।, इतनी कथा सुनाकर बेताल चुप हो गया। कुछ देर बाद बेताल ने पूछा, “महाराज, बताइए, उन चारों राजकुमारियों में सबसे ज्यादा कोमल कौन थी?”, विक्रम चुप रहे। तब बेताल बोला, “विक्रम, यदि तुम उत्तर जानते हुए भी अपना न्याय मुझे नही बताओगे तो मैं अपने योगबल से तुम्हारे धर को शरीर से अलग कर दूँगा।”, विक्रम मजबूर थे उन्होंने कहा, “बेताल, यदि कोमलता की बात की जायें तो शरीर के कोमलता से ज्यादा मन की कोमलता महत्व रखती हैं। उन चारों में सबसे कोमल छोटी राजकुमारी थी जिसमें शारीरिक कोमलता के साथ-साथ मन की कोमलता भी थीं।, राजा के इतना कहते ही बेताल अपने आपको राजा के बंधन से छुड़ाकर फिर से भाग खड़ा हुआ। राजा फिर मसान में चल पड़े और जब वह उसे लेकर चले तो उसने एक और कहानी सुनायी।, एक समय की बात है, पुण्यपुर नामक राज्य में यशकेतु नाम का राजा राज करते थे। उनका सत्यमणि नाम का बड़ा ही समझदार, कर्मठ और चतुर मंत्री था परन्तु राजा बड़ा विलासी था। राज्य का सारा बोझ मंत्री पर डालकर वह भोग में पड़ गया।, एक दिन की बात है राजा के दरबार में एक चित्रकार आया। उसने एक से बढ़कर एक सुंदर और आकर्षक चित्र राजा को दिखाये जिसे देखकर राजा उन चित्रों पर मुग्ध हो गया। उसने चित्रकार के कला पर प्रसन्न होकर उसे सोने से तौल दिया और ढ़ेर सारा ईनाम दिया। सभी दरबारी “कला पारखी राजा की जय-जयकार करने लगे” लेकिन मंत्री को बहुत दु:ख हुआ।, राजा के दानशीलता और भोग-विलासिता में अधिक व्यय के फलस्वरूप राजकोष का धन दिन-प्रतिदिन घटने लगा। प्रजा राजा से निराश हो गयी। मंत्री ने जब देखा कि राजा के साथ सब जगह उसकी भी निन्दा होती है तो उसका मन कुछ उचट गया। उसने मन को शांत करने के लिए तीर्थयात्रा पर जाने की सोची और राजा से आज्ञा लेकर वह तीर्थ-यात्रा पर चला गया।, एक दिन सत्यमणि घूमते हुए समुद्र तट पर जा पहुँचा और वहीं ठहर गया। आधी रात के समय वह क्या देखता है की समुद्र से एक सुंदर वृक्ष निकल रहा है, वह वृक्ष अद्भुत रोशनी से जगमगा रहा था। उस पर हीरे-मोती के फल लगे हुए थे। उसकी मोटी-मोटी शाखाओं पर रत्नों से जुड़ा एक पलंग बिछा था। उस पर एक रूपवती कन्या बैठी वीणा बजा रही थी। इस दिव्य चमत्कार को देखकर उसके आश्चर्य का ठिकाना न रहा। थोड़ी देर बाद वह रूपवती कन्या गायब हो गयी। पेड़ भी नहीं रहा। Asha Patel. विक्रम कुछ नहीं बोला। The series is adapted from the original Sanskrit classic, “Betaal Pachisi.” Betaal Pachisi is the work of Mahakavi Somdev Bhatt. by moralstory.in; November 27, 2020 November 30, 2020; The Three Suitors – Vikram and Betal Vikram climbed the ancient tree to bring the corpse down once again and soon he began crossing the… 2:37:16. This will remove all the songs from your queue. तुमने यह कठिन काम करके मेरे साथ बड़ा उपकार किया है। तुम सचमुच सारे राजाओं में श्रेष्ठ हो।”, इतना कहकर उसने मुर्दे को उसके कंधे से उतार लिया और उसे स्नान कराकर फूलों की मालाओं से सजाकर रख दिया। फिर मंत्र-बल से बेताल का आवाहन करके उसकी पूजा की। पूजा के बाद उसने राजा से कहा, “हे राजन्! राजा ने उस स्त्री का सिर मुँड़वाकर, गधे पर चढ़ाकर, नगर में घुमवाया और शहर से बाहर छुड़वा दिया।”, यह कहानी सुनाकर बेताल बोला, “विक्रम अब तुम फैसला करो, बताओ कि दोनों में ज्यादा पापी कौन है?”, राजा ने कहा, “स्त्री।” बेताल ने पूछा, “कैसे?”, विक्रम ने कहा, “मर्द कैसा ही दुष्ट हो, उसे धर्म का थोड़ा-बहुत विचार रहता ही है। स्त्री को नहीं रहता। अब चोर को ही देखो, वह इन दोनों से ज्यादा दुष्ट हैं पर जब उसने एक बेकसूर आदमी को मरते देखा तो उससे नहीं रहा गया और उसने अपनी परवाह किये बगैर राजा को सब बात बता दी। इसलिए स्त्री ही अधिक पापिन है।”, राजा के इतना कहते ही बेताल फिर पेड़ पर जा लटका। विक्रमादित्य लौटकर गया और उसे पकड़कर लाया। फिर बेताल ने राजा को चालाकी से अपनी शर्तों में फंसा कर एक और कहानी सुनाई।, मगध देश में महाबल नाम का एक राजा राज्य करता था । जिसके महादेवी नाम की बड़ी सुन्दर कन्या थी। वह अद्वितीय रूपवती थीं। जब वह विवाह योग्य हुई तो राजा को बहुत चिन्ता होने लगी।, बहुत से राजकुमार आये लेकिन राजकुमारी को कोई पसंद न आया। राजा ने सोचा जो राजकुमार शक्तिशाली और गुणवान होगा उसी से राजकुमारी का विवाह होगा। एक दिन एक राजकुमार राजदरबार में आया और बोला, “मैं राजकुमारी का हाथ मांगने आया हूँ।”, राजा ने कहाँ, “मैं अपनी लड़की उसे दूँगा, जिसमें सब गुण होंगे।” राजकुमार ने कहा, “मेरे पास एक ऐसा रथ है, जिस पर बैठकर जहाँ चाहो, घड़ी-भर में पहुँच जाओगे।”, राजा बोला, “ठीक है। कुछ दिन इंतजार करें, मैं राजकुमारी से पूछकर बताता हूँ।” फिर एक दिन एक और राजकुमार आया। उसने कहा- “मैं त्रिकालदर्शी हूँ। मैं भूत, वर्तमान और भविष्य तीनों की बातें बता सकता हूँ।”राजा ने उसे भी इंतजार करने को कहा।, कुछ दिन बाद एक और राजकुमार आया। जब राजा ने उससे पूछा कि आपमें क्या गुण हैं तब उसने कहा- “मैं धनुर्विद्या में निपुण हूँ। धनुष चलाने में मेरा कोई मुकाबला नहीं कर सकता।”, इस तरह तीन वर इकट्ठे हो गये। राजा सोचने लगा कि कन्या एक है, राजकुमार तीन हैं। तीनों ही सुंदर और गुणवान हैं। क्या करे! Pichli kahani me apko pata chala hoga ke Vikram aur Betal kaise mile. दूसरी ओर यह मुश्किल कि न दे तो दीवान का लड़का मर जायें।, बहुत सोच-विचार करने के बाद राजा ने दोनों का विवाह कर दिया। बनावटी कन्या ने यह शर्त रखी कि चूँकि वह दूसरे के लिए लायी गयी थी, इसलिए उसका यह पति छ: महीने तक तीर्थ-यात्रा करेगा, तब वह उससे बात करेगी। दीवान के लड़के ने यह शर्त मान ली।, विवाह के बाद वह उसे मृगांकदत्ता के पास छोड़ तीर्थ-यात्रा पर चला गया। उसके जाने के कुछ दिनों के बाद ही उस कन्या-रूपधारी ब्राह्मण का भेद मृगांकदत्ता के सामने खुल गया जिसके बाद दोनों आनन्द से रहने लगे। अब ब्राह्मण कुमार रात में आदमी बन जाता और दिन में कन्या बना रहता।, जब छ: महीने बीतने को आये तो वह एक दिन मृगांकदत्ता को लेकर भाग गया।, उधर सिद्ध-गुरु एक दिन अपने मित्र दिनकर को युवा पुत्र बनाकर राजा के पास लाया और उस कन्या को माँगा। शाप के डर के मारे राजा ने कहा, “वह कन्या तो जाने कहाँ चली गयी। आप मेरी कन्या से इसका विवाह कर दें।”, वह राजी हो गया और राजकुमारी का विवाह दिनकर के साथ कर दिया। घर आने पर उसी रूपधारी ब्राह्मण कुमार ने कहा, “यह राजकुमारी मेरी स्त्री है। मैंने इससे गंधर्व-रीति से विवाह किया है।”, दिनकर ने कहा, “यह मेरी स्त्री है, क्योंकि मैंने सबके सामने विधि-पूर्वक ब्याह किया है।”, इतना कहकर बेताल ने पूछा, ” राजन् यह बताओ शशिप्रभा दोनों में से किसकी पत्नी होनी चाहिये?”, राजा ने कहा, “मेरी राय में वह दिनकर की पत्नी है, क्योंकि राजा ने सबके सामने विधि-पूर्वक विवाह किया था। ब्राह्मण कुमार ने तो चोरी से ब्याह किया था। चोरी की चीज़ पर चोर का अधिकार नहीं होता, साथ ही उसने अपने विलासिता के कारण शशिप्रभा और मृगांकदत्ता दोनों को धोखा दिया”, इतना सुनना था कि बेताल गायब हो गया और राजा को जाकर फिर उसे लाना पड़ा। रास्ते में बेताल ने फिर एक कहानी सुनायी।, हिमाचल पर्वत पर गंधर्वों का एक नगर था, जिसमें जीमूतकेतु नामक राजा राज करता था। उसका एक लड़का था, जिसका नाम जीमूतवाहन था। बाप-बेटे दोनों भले थे। धर्म-कर्म में लगे रहते थे। इससे प्रजा बहुत स्वच्छन्द हो गयी और एक दिन उन्होंने राजा के महल को घेर लिया। राजकुमार ने यह देखा तो पिता से कहा कि आप चिन्ता न करें। मैं सबको मार भगाऊँगा। राजा बोला, “नहीं, ऐसा मत करो। युधिष्ठिर भी महाभारत करके पछताये थे।”, इसके बाद राजा अपने गोत्र के लोगों को राज्य सौंप राजकुमार के साथ मलयांचल पर्वत पर जाकर मढ़ी बनाकर रहने लगा। वहां जीमूतवाहन की एक ॠषि के बेटे से मित्रता हो गयी। एक दिन दोनों पर्वत पर भवानी के मन्दिर में गये तो दैवयोग से उन्हें मलयकेतु नामक राजा की पुत्री मिली। दोनों एक-दूसरे पर मोहित हो गये। जब कन्या के पिता को मालूम हुआ तो उसने अपनी बेटी उसे ब्याह दी।, एक दिन की बात है कि जीमूतवाहन को पहाड़ पर एक सफ़ेद ढेर दिखाई दिया। पूछा तो मालूम हुआ कि पाताल से बहुत-से नाग आते हैं, जिन्हें गरुड़ खा लेता है। यह ढेर उन्हीं की हड्डियों का है। उसे देखकर जीमूतवाहन आगे बढ़ गया।, कुछ दूर जाने पर उसे किसी के रोने की आवाज़ सुनाई दी। पास गया तो देखा कि एक बुढ़िया रो रही है। कारण पूछा तो उसने बताया कि आज उसके बेटे शंखचूड़ नाग की बारी है। उसे गरुड़ आकर खा जायेगा। जीमूतवाहन ने कहा, “माँ, तुम चिन्ता न करो, मैं उसकी जगह चला जाऊँगा।” बुढ़िया ने बहुत समझाया, पर वह न माना।, इसके बाद गरुड़ आया और उसे चोंच में पकड़कर उड़ा ले गया। संयोग से राजकुमार का बाजूबंद गिर पड़ा, जिस पर राजा का नाम खुदा था। उस पर खून लगा था। राजकुमारी ने उसे देखा तो वह मूर्च्छित हो गयी। होश आने पर उसने राजा और रानी को सब हाल सुनाया। वे बड़े दु:खी हुए और जीमूतवाहन को खोजने निकले। तभी उन्हें शंखचूड़ मिला। उसने गरुड़ को पुकार कर कहा, “हे गरुड़! Takip et. Vikram Aur Betaal Ki Kahaniya | Kids Animated Hindi Series 1. Tarun Khanna (L) and Badrul Islam in a still from the TV show 'Kahaniyan Vikram Aur Betaal Ki'. Vikram Aur Betaal Ki Kahaniya | Kids Animated Hindi Series 1. यह बताओ कि राजा और सेवक, दोनों में से किसका काम बड़ा हुआ? कुछ देर चलने के बाद बेताल बोला, “विक्रमादित्य तुम भी बड़े हठी हो, कोई बात नही तुम भी ज्ञानी मैं भी ज्ञानी इस कारण मार्ग में चुप रहना शोभा नहीं देता।” Jadui angoothi ki kahani. Playing next . mythological collection of 25 stories known as Baital Pachisi. betal pachchisi,Vikram betal stories,Vikram betal ki kahaniyan,Betal pachchisi ki kahaniyan hindi me,Virakram betal stories in hindi Vikram Aur Betaal Ki Kahaniya | Kids Animated Hindi Series 2. Watch fullscreen. Playing next. Top 10 Moral stories in hindi. Spread the loveVikram aur Betal – Sonprabha ka swayanvar. Read: सेंसेक्स और निफ्टी में क्या अंतर है? Motivational stories in hindi. पूर्वजों की यह कहानी को हम प्रणाम करते हैं ❣❣❣❣❣, कमेंट बॉक्स का उपयोग करके आप इस लेख पर अपने विचार प्रकट कर सकते हैं, अथवा कोई प्रश्न पूछ सकते हैं। कैशिंग के कारण किये गये कमेंट शीघ्र प्रकाशित नही होते हैं।, सोशल नेटवर्क पर जुड़े या अन्य लेखों को खोजें, सफलता पाने की प्रेरणा देनेवाले 51 सुविचार – Success Quotes in Hindi, Family Quotes in Hindi – परिवार से जुड़े कुछ अच्छे सुविचार, Personality Quotes in Hindi – व्यक्तित्व पर अनमोल वचन, Best Life Quotes in Hindi – जीवन पर महान लोगों के सुविचार, विस्तार से राजा विक्रम, योगी और बेताल की कहानी जानने के लिए यहां क्लिक करें।, विक्रम बेताल के सभी कहानियों की सूची – List of Vikram Betal Stories. If everyone loves it our effort will be successful. Yasiro Vernualo2321. Aj fir Vikram ne Betal ko pakda aur usko apne pith par bithakar le ja raha tha. बैताल पचीसी बीसवीं कहानी: बालक क्यों हँसा?, विक्रम -बेताल की कहानियाँ, बैताल पच्चीसी की कहानियाँ, Baital Pachisi Twentieth Story: Balak Kyo Hansaa?, Vikram-Baital Stories In Hindi, Vikram-Baital ki Kahani In Hindi, Vikram-Baital Hindi Stories राजा ने कहा, “मैं एक चोर हूँ लेकिन तुम कौन हो?” हमेशा भीख माँगते रहेंगें। इससे तो मरना ही अच्छा है। तुम इस फल को ले जाकर राजा को दे आओ और बदले में कुछ धन ले आओ।”, यह सुनकर ब्राह्मण फल लेकर राजा भर्तृहरि के पास गया और सारा हाल कह सुनाया। भर्तृहरि ने फल ले लिया और ब्राह्मण को एक लाख मोहरे देकर विदा कर दिया।, भर्तृहरि अपनी एक रानी को बहुत चाहता था। उसने महल में जाकर वह फल उसी को दे दिया। रानी की मित्रता शहर-कोतवाल से थी। उसने वह फल कोतवाल को दे दिया। कोतवाल एक वेश्या के पास जाया करता था। वह उस फल को उस वेश्या को दे आया। वेश्या ने सोचा कि यह फल तो राजा को खाना चाहिए वह इसे खाकर सिर्फ पाप ही करेगी। राजा जीवित रहेगा तो सबका भला करेगा। वह उसे लेकर राजा भर्तृहरि के पास गई और उसे दे दिया।, भर्तृहरि ने उसे बहुत-सा धन दिया, लेकिन जब उसने फल को अच्छी तरह से देखा तो पहचान लिया। उसे बड़ी चोट लगी, पर उसने किसी से कुछ कहा नहीं। उसने महल में जाकर रानी से पूछा कि तुमने उस फल का क्या किया। रानी ने कहा, “मैंने उसे खा लिया।” राजा ने वह फल निकालकर दिखा दिया। रानी घबरा गयी और उसने सारी बात सच-सच कह दी। भर्तृहरि ने पता लगाया तो उसे पूरी बात ठीक-ठीक मालूम हो गयी। वह बहुत दु:खी हुआ। उसने सोचा, यह दुनिया माया-जाल है। इसमें अपना कोई नहीं। वह फल लेकर बाहर आया और उसे धुलवाकर स्वयं खा लिया। फिर राजपाट छोड़, योगी का वेश बना, जंगल में तपस्या करने चला गया।, भर्तृहरि के जंगल में चले जाने से विक्रम की गद्दी सूनी हो गयी। जब राजा इन्द्र को यह समाचार मिला तो उन्होंने एक देव को धारा नगरी की रखवाली के लिए भेज दिया। वह देव रात-दिन वहीं रहकर राज्य की रखवाली करने लगा।, भर्तृहरि के राजपाट छोड़कर वन में चले जाने की बात विक्रम को मालूम हुई तो वह लौटकर अपने देश में आया। आधी रात का समय था। जब वह नगर में घुसने लगा तो देव ने उसे रोका। राजा ने कहा, “मैं विक्रम हूँ। यह मेरा राज है। तुम रोकने वाले कौन होते हो?”, देव बोला, “मुझे राजा इन्द्र ने इस नगर की चौकसी के लिए भेजा है। तुम सच्चे राजा विक्रम हो तो आओ, पहले मुझसे लड़ो क्योंकि सिर्फ विक्रम ही मुझे हरा सकता हैं।”, दोनों में लड़ाई हुई। राजा ने ज़रा-सी देर में देव को पछाड़ दिया। तब देव बोला, “हे राजन्! 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